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आते-जाते हुए सब पर नजर रखता हूं
कई लोग तो महज सनसनी या थ्रिल की खातिर मुखबिरी पर उतर आते हैं। आम जनता की नजरों से पूरी तरह ओझल ये लोग पुलिस और खुफिया एजेंसियों के आंख और कान हैं। भारत की आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आई. बी.) में भी मुखबिरों को मासिक तौर पर पैसा दिया जाता है। न ही पुलिस थाना स्तर पर मुखबिर बनाने और उन्हें पालने के लिए 'सोर्स मनी' के नाम पर कोई राशि अलग रखती है।
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