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विश्‍वकर्मा भगवान को प्रिय है ये आरती, मशीनों की पूजा करते समय पढ़ना ना भूलें इसे
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥ आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया। शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥ ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई। ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना। द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥ ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे। मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥ श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
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