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कहानी: कल नहीं आता
आसपास बैठे ठलुए उसके भरपूर बदन पर हमेशा नजरें गड़ाए रहते, पर उसे किसी की चिंता नहीं थी। बिंदास पंप चलाती दिखती और वे ठलुए पंप को लेकर उल्टे-सीधे फिकरे कसने से बाज नहीं आते। लेकिन पता नहीं क्यों कभी-कभी वह उससे फोटोकॉपी का पैसा ही नहीं लेती थी। बोली, 'एक बेटा और एक बेटी।' 'पर वहां से इतनी दूर?. ' 'यही तो समझ नहीं आता कि मैं इतनी दूर कैसे चली आई? पति दंगे में मारा गया।
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