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दूसरी नजरः चुनावी साल में बड़ा सवाल
एनडीए सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद जून, 2014 में कच्चे तेल के दाम 109 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थे। यह अकेला ऐसा बड़ा कारण था जिसने वृहद आर्थिक संकेतकों को दुरुस्त करने में भूमिका निभाई थी। एनडीए सरकार के चार साल में वित्तीय घाटा 4.1, 3.9, 3.5 और 3.5 फीसद रहा और 2018-19 में यह 3.3 फीसद रहने का अनुमान है। ध्यान देना जरूरी आखिरी शब्द अक्तूबर में आने वाली आरबीआइ की मौद्रिक नीति में सुनने को मिल सकता है।
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